नारी दिवस

नारी में है शक्ति सारी,
फिर नारी क्यूँ है दुखियारी,
अपना सब फ़र्ज़ निभाती है,
तभी तो नारी कहलाती है,

नारी दुर्गा, नारी काली,
यही हैं माँ शेरावाली,
नारी जो जिद पर आ जाए,
अबला से चंडी बन जाए,

नारी सीता, नारी राधे,
बिन जिनके राम-कृष्ण भी आधे,
नारी कोमल, नारी कठोर,
बिन इनके कहाँ नर का छोर,

नारी जीती अपनों के लिए,
फिर नैनो के आंसू क्यूँ पिए,
कुछ उनके भी अपने सपने,
क्यूँ रौंदे जिन्हें उनके अपने,

नारी ही है शोभा घर की,
नारी ही इज्जत हर नर की,
जो नारी को प्यार मिले,
घर में खुशियों के फूल खिले,

नारी दिवस, बस एक दिवस,
क्यूँ नारी के नाम मनाना है,
हर दिन, हर पल, नारी उत्तम,
अब ये नया ज़माना है।

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