तमाशा

कौन जीता है आजकल, किसी और के लिए,
हमने यहाँ रोज, मोहब्बत के तमाशे देखे हैं।

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इल्म

उन्हें ये इल्म है की हम उनसे मोहब्बत करते हैं,
वर्ना यूँ रोज, झरोखे से हमें निहारा नहीं करती।

इल्म

तुम्हारी मोहब्बत

तुम्हारी मोहब्बत में कुछ तो बात है,
तुमसे दूर होकर भी तुम्हारा साथ है,
अकेला हूँ, पर अकेलापन महसूस नहीं होता,
पास नहीं, पर यादों में हरदम साथ है,

ये जो फासलें हैं हमारे दरमियान,
वक़्त के साथ जल्द ही मिट जाएंगे,
वो पल वो शमाँ कुछ और होगा,
होंगे रूबरू और बाहों में सिमट जाएंगे।

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