मैं और मेरे अपने

मैं कल भी उड़ता था,
मैं आज भी उड़ता हूँ,
पहले दो पैरों की सवारी थी,
अब चार पहियों पे चलता हूँ।

जिंदगी ने रफ़्तार तो पकड़ ली,
जमाने के साथ मैं भी तेज हो लिया,
पर जीने की इस भाग-दौड़ में,
हर ख़ुशी को अनदेखा करता गया,
वही ख़ुशी, जिनसे मेरा संसार चलता था,
जिनसे मेरा घर, घर बनता था।

देर से ही सही पर,
इस बात का एहसास हुआ,
घर से ज्यादा, कैसे और कब?
कुछ और मेरे लिए ख़ास हुआ,
अब सब कुछ संवारना है,
खुद को परिवार पे वारना है।

बीते पलों को वापस ला तो नहीं सकता पर,
आने वाले पल को खुशनुमा बना सकता हूँ,
सबके चेहरे पर हँसी ला सकता हूँ,
सबसे अहम्, मैं घर पर वक़्त दे सकता हूँ,
मैं कैसे भूल गया था की इनकी हँसी,
इनके खिले चेहरे, यही तो मेरी ऊर्जा थी।

अब मैं जीऊंगा भरपूर, अपनों के साथ,
अपनों के लिए अपनों से दूर रहकर देख लिया,
वो जगह बहुत सुना है, बहुत सन्नाटा है,
अपने घर पे तो शोर में भी शान्ति है,
अब खुश हूँ मैं फिर से जमीन पे पैर टिका के,
सुकून से जीऊंगा अब, अपनों को अपने सीने से लगा के।

Advertisements

तुम बेवफा हो

अच्छा हुआ की तुम बेवफा निकली,
मेरी वफ़ा के लायक तुम थी भी नहीं।

होते थे जब भी साथ हम दोनों,
उन पलों को शायद मैं अकेला ही जीता था,
हंसती मुस्काती तुम साथ तो होती थी,
पर कभी उन पलों में शामिल थी ही नहीं,
अच्छा हुआ की तुम बेवफा निकली,
मेरी वफ़ा के लायक तुम थी भी नहीं।

मेरे ‘हम’ में हम दोनों होते थे,
पर तुम्हारे ‘हम’ और ‘मैं’ एक से थे,
मेरा प्यार था और तुम्हारा छलावा,
तुम कभी इस रिश्ते में थी ही नहीं,
अच्छा हुआ की तुम बेवफा निकली,
मेरी वफ़ा के लायक तुम थी भी नहीं।

एक मूरत थी मन में मेहबूब की,
गलती हो गयी थी मुझसे पहचानने में,
आहिस्ता आहिस्ता तुमने साबित कर दिया,
उस मूरत की सूरत तुम कभी थी ही नहीं ,
अच्छा हुआ की तुम बेवफा निकली,
मेरी वफ़ा के लायक तुम थी भी नहीं।

कर लो मोहब्बत

की दुनिया में आये हो तो,
एक बार मोहब्बत जरूर करना,
खुद के लिए तो उम्र भर जीते हो,
कुछ उम्र किसी और के नाम कर देखना,

एक नशा है ये जिंदगी का,
बिन इसके जिए तो क्या किये,
दो पल की तो जिंदगी है,
एक पल जी लो किसी और के लिए।

कर लो मोहब्बत.jpg

इल्म

उन्हें ये इल्म है की हम उनसे मोहब्बत करते हैं,
वर्ना यूँ रोज, झरोखे से हमें निहारा नहीं करती।

इल्म

तुम्हारी मोहब्बत

तुम्हारी मोहब्बत में कुछ तो बात है,
तुमसे दूर होकर भी तुम्हारा साथ है,
अकेला हूँ, पर अकेलापन महसूस नहीं होता,
पास नहीं, पर यादों में हरदम साथ है,

ये जो फासलें हैं हमारे दरमियान,
वक़्त के साथ जल्द ही मिट जाएंगे,
वो पल वो शमाँ कुछ और होगा,
होंगे रूबरू और बाहों में सिमट जाएंगे।

तुम्हारी मोहब्बत.jpg

जुदाई

तुमसे बिछड़ के जीने के लिए,
जिंदगी कब जो तैयार हो गयी,
पता ही नहीं चला,
बस दो पल का मिलना था,
फिर लम्बी जुदाई,
उस दो पल के मिलन में,
पतझड़ भी मानो बहार हुई,
आज मैं यहाँ और तुम वहाँ,
बस दिन और महीने गिने जा रहे हैं,
इंतजार के लम्हों में जीए जा रहें हैं,
एक धुंधला सा ख्वाब है,
जो होंगे कभी पुरे,
अपनी मजबूरियां ही,
हम दोनों के बीच दीवार हुई,
अब तो इंतजार है,
उस पल का,
जब मेरी दुनिया मेरी बाहों में होगी,
कुछ और नहीं मैं चाहूंगा,
थाम तुझे बाहों में,
सीने से अपने लगा लूंगा,
इतना प्यार करूँगा तुमसे,
ना कोई कमी ना कोई ग़म,
आस पास होगा,
मैं हूँ तुम्हारे पास और प्यार,
सिर्फ प्यार का एहसास होगा।

दिल मजबूर है

दिन ढल गया है, रात छाई है,
धड़कन पुकारे, तेरी याद आयी है,
हर पल यही सोचु, मैं दूर क्यूँ हूँ?
मिल नहीं सकता, इतना मजबूर क्यूँ हूँ?

रोशन है आसमाँ, खुश है जहाँ,
रंग बिखेर रही है सारी फ़िज़ाँ,
फिर मेरा मन इतना उदास क्यूँ है?
दिल में तड़प सा एहसास क्यूँ है?

सब है यहां,बस तेरी कमी है,
आँखों में मेरे, अब तक नमी है,
तुमसे मिलने को मन मचलता है,
ये पागल तुमसे बहुत प्यार करता है,

हर पल बीते तेरे संग, अब चाहत यही है,
तुम बिन मन नहीं लगता, शायद मोहब्बत यही है,
खुश थे अकेले कभी, अब खुशियाँ लाऊँ कहाँ से,
कह दो गर एक बार तो, तुम्हे छीन लाऊँ जहाँ से।

जब तुम मिले

वक़्त ठहर सा गया होगा,
मोहब्बत की ओस गिरी होगी,
बहती हवाओं ने छुआ था शायद,
जब तुम मिले,

समय की उस पहेली में कुछ ख़ास था,
कुछ तो जोड़ रहा था दिल को हमारे,
एक मुस्कान थी चेहरे पर मेरे,
जब तुम मिले,

कुछ तो बात थी तुम्हारी अदा में,
उलझन और खुशियाँ साथ दिख रही थी,
फिर मेरे हाथों में आया तुम्हारा हाथ,
जब तुम मिले,

कुछ तो बात थी उस छुअन में,
एक अलग एहसास था, और,
दिल की धड़कन बढ़ गयी थी,
जब तुम मिले,

तेरे पलकों के इशारें कुछ तो कह रहे थे,
अब तुम ही बताओ उन इशारों की सदाएँ,
कैसे थे हालात तुम्हारे?
जब हम मिले।