तमाशा

कौन जीता है आजकल, किसी और के लिए,
हमने यहाँ रोज, मोहब्बत के तमाशे देखे हैं।

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कर लो मोहब्बत

की दुनिया में आये हो तो,
एक बार मोहब्बत जरूर करना,
खुद के लिए तो उम्र भर जीते हो,
कुछ उम्र किसी और के नाम कर देखना,

एक नशा है ये जिंदगी का,
बिन इसके जिए तो क्या किये,
दो पल की तो जिंदगी है,
एक पल जी लो किसी और के लिए।

इल्म

उन्हें ये इल्म है की हम उनसे मोहब्बत करते हैं,
वर्ना यूँ रोज, झरोखे से हमें निहारा नहीं करती।

तुम्हारी मोहब्बत

तुम्हारी मोहब्बत में कुछ तो बात है,
तुमसे दूर होकर भी तुम्हारा साथ है,
अकेला हूँ, पर अकेलापन महसूस नहीं होता,
पास नहीं, पर यादों में हरदम साथ है,

ये जो फासलें हैं हमारे दरमियान,
वक़्त के साथ जल्द ही मिट जाएंगे,
वो पल वो शमाँ कुछ और होगा,
होंगे रूबरू और बाहों में सिमट जाएंगे,

जब तुम मिले

वक़्त ठहर सा गया होगा,
मोहब्बत की ओस गिरी होगी,
बहती हवाओं ने छुआ था शायद,
जब तुम मिले,

समय की उस पहेली में कुछ ख़ास था,
कुछ तो जोड़ रहा था दिल को हमारे,
एक मुस्कान थी चेहरे पर मेरे,
जब तुम मिले,

कुछ तो बात थी तुम्हारी अदा में,
उलझन और खुशियाँ साथ दिख रही थी,
फिर मेरे हाथों में आया तुम्हारा हाथ,
जब तुम मिले,

कुछ तो बात थी उस छुअन में,
एक अलग एहसास था, और,
दिल की धड़कन बढ़ गयी थी,
जब तुम मिले,

तेरे पलकों के इशारें कुछ तो कह रहे थे,
अब तुम ही बताओ उन इशारों की सदाएँ,
कैसे थे हालात तुम्हारे?
जब हम मिले।