अतीत

ढूंढ रहा था कुछ,
बंद लिफाफों में,
दिख गए,
कुछ अतीत के टुकड़े,
समेट रखे थे,
जिन्हें अलमारी में,
कुछ खत थे मोहब्बत के,
कुछ सुखी पंखुड़ियाँ,
गुलाब की,
कुछ तोहफ़े थे,
मोहब्बत के,
उन तोहफ़ों में, ताजमहल,
मेरा ख़ास है,
 
टूट चुके उन ख्वाबों में,
शायद अब भी कुछ बाकी है,
एक भीनी सी खुशबू,
कुछ तेज धड़कनें,
और बंद आखों में छिपी,
उनके प्यार की नमी।
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