every Atom

“Every atom of your flesh is as dear to me as my own: in pain and sickness it would still be dear.”

― Charlotte Brontë

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मेरी जिंदगी

आज मन बड़ा भावुक सा हो रहा है। आज ६ दशक पुरे हो गए मेरे इस जिंदगी के सफर को। काफी उतार चढ़ाव देखे हैं मैंने इस जिंदगी में। एक समय था जब काफी कुछ करने की चाह थी और मैं बस करता चला गया। इसी करते करते में ना जाने मेरे जिंदगी के वो अनमोल पल कहीं खो से गए। ऐसा महसूस हो रहा है जैसे की मैंने बस अपनी जिंदगी काटी है, कभी जी नहीं पाया। अब जब जीवन के अंतिम पड़ाव पर हूँ तो जीने के चाहत फिर से जाग उठी है। ऊंचाई पर उड़ते उड़ते आज मुझे जमीन की याद सता रही है। मन कर रहा है की फिर अपने जुते खोल खाली पैरों से दौड़ पड़ूँ उन कच्ची गलियों में जहाँ मैंने अपने बचपन को बड़ा होते देखा था।

“चल दौड़ चलें उन गलियों में जहां बचपन छूट गया था।
वो सुकून और मन की ख़ुशी शायद फिर से मिल जाए।”

काश की ऐसा हो पाता और एक बार फिर से शुरुआत करने का मौका मिलता तो कम से कम एक बार जी लेता। पर अफ़सोस की ऐसा नहीं हो सकता। जो पल मिले थे जीने को उसे तो मैंने गँवा दिया और अब पछताने के अलावा कुछ कर नहीं सकता। कभी कभी खुद से पूछता हूँ की क्या सारा दोष मेरा ही था? क्या मेरी जिंदगी थोड़ी अलग हो सकती थी? तो जवाब मिलता है की हाँ, अगर मैं चाहता तो मेरी जिंदगी अलग और बेहतर हो सकती थी। कुछ दोष मेरा और कुछ हालात का भी असर था की मैं अपनी जीने की चाहत को भूल किसी और को अपनी चाहत बना चुका था। और मेरी चाहत थी अधिक से अधिक पैसा कमाने का नशा। मैंने खूब पैसे कमाए, खूब इज्जत भी बटोरी पर आज ऐसा लग रहा है जैसे की मेरी पूरी उम्र की कमाई और ये इज्जत सब के सब अधूरी और खोखली है। अब जो बीत गया जो पल तो फिर वापस नहीं आ सकता, कोशिश यही रहेगी की आने वाले कल को बीते कल जैसा ना होने दूँ।

“तमाम उम्र गुजर गयी, पैसा कमाने में,
अब सोचता हुँ, दो पल ठहर कर जी लूँ जरा।”

दिल मजबूर है

दिन ढल गया है, रात छाई है,
धड़कन पुकारे, तेरी याद आयी है,
हर पल यही सोचु, मैं दूर क्यूँ हूँ?
मिल नहीं सकता, इतना मजबूर क्यूँ हूँ?

रोशन है आसमाँ, खुश है जहाँ,
रंग बिखेर रही है सारी फ़िज़ाँ,
फिर मेरा मन इतना उदास क्यूँ है?
दिल में तड़प सा एहसास क्यूँ है?

सब है यहां,बस तेरी कमी है,
आँखों में मेरे, अब तक नमी है,
तुमसे मिलने को मन मचलता है,
ये पागल तुमसे बहुत प्यार करता है,

हर पल बीते तेरे संग, अब चाहत यही है,
तुम बिन मन नहीं लगता, शायद मोहब्बत यही है,
खुश थे अकेले कभी, अब खुशियाँ लाऊँ कहाँ से,
कह दो गर एक बार तो, तुम्हे छीन लाऊँ जहाँ से।

अर्धांगिनी

हमसफ़र की तलाश और सफर लम्बा था,
जहां रुके कदम, वो दर तेरा था,
मिलने की बेचैनी थी और एक एहसास था,
कोई था वहां, जो अब मेरा था,

ख़ुशी क्या होती है, अब मालुम हुआ,
जब भगवान ने मुझे, तुमसे मिला दिया,
पत्नी बनाके, जीने का जरिया बना के,
उम्र भर के लिए ये तोहफा दिया,

वो तोहफा हो तुम, भगवान का मुझे,
जिसे कभी तौल नहीं सकता,
एक प्यार इतना पावन, इतना पवित्र,
जिसे कभी मोल नहीं सकता,

इतना वादा है तुमसे की,
खुद को ढूंढ न पाओगी,
जब मेरी बाहों में आ के,
तुम सीने से लिपट जाओगी,

मेरे जीवन का सबेरा हो तुम,
एक चहकती चिड़िया की तरह,
बड़े लाड से रखूँगा तुम्हे,
एक प्यारी गुड़िया की तरह,

कल तक तुम  मेरी चाहत थी,
अब आदत बन गयी हो,
पहले सिर्फ सोचा करता था,
अब इबादत बन गयी हो।