दिल मजबूर है

दिन ढल गया है, रात छाई है,
धड़कन पुकारे, तेरी याद आयी है,
हर पल यही सोचु, मैं दूर क्यूँ हूँ?
मिल नहीं सकता, इतना मजबूर क्यूँ हूँ?

रोशन है आसमाँ, खुश है जहाँ,
रंग बिखेर रही है सारी फ़िज़ाँ,
फिर मेरा मन इतना उदास क्यूँ है?
दिल में तड़प सा एहसास क्यूँ है?

सब है यहां,बस तेरी कमी है,
आँखों में मेरे, अब तक नमी है,
तुमसे मिलने को मन मचलता है,
ये पागल तुमसे बहुत प्यार करता है,

हर पल बीते तेरे संग, अब चाहत यही है,
तुम बिन मन नहीं लगता, शायद मोहब्बत यही है,
खुश थे अकेले कभी, अब खुशियाँ लाऊँ कहाँ से,
कह दो गर एक बार तो, तुम्हे छीन लाऊँ जहाँ से।

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अर्धांगिनी

हमसफ़र की तलाश और सफर लम्बा था,
जहां रुके कदम, वो दर तेरा था,
मिलने की बेचैनी थी और एक एहसास था,
कोई था वहां, जो अब मेरा था,

ख़ुशी क्या होती है, अब मालुम हुआ,
जब भगवान ने मुझे, तुमसे मिला दिया,
पत्नी बनाके, जीने का जरिया बना के,
उम्र भर के लिए ये तोहफा दिया,

वो तोहफा हो तुम, भगवान का मुझे,
जिसे कभी तौल नहीं सकता,
एक प्यार इतना पावन, इतना पवित्र,
जिसे कभी मोल नहीं सकता,

इतना वादा है तुमसे की,
खुद को ढूंढ न पाओगी,
जब मेरी बाहों में आ के,
तुम सीने से लिपट जाओगी,

मेरे जीवन का सबेरा हो तुम,
एक चहकती चिड़िया की तरह,
बड़े लाड से रखूँगा तुम्हे,
एक प्यारी गुड़िया की तरह,

कल तक तुम  मेरी चाहत थी,
अब आदत बन गयी हो,
पहले सिर्फ सोचा करता था,
अब इबादत बन गयी हो।

तेरी याद

तेरी यादों की तपिश ने पल पल जलाया,
आँखें सुखी रही, दिल को सदा रुलाया,
साँसों की तरह बस गयी हो सीने में,
उतना याद आती गयी, जितना तुझे भुलाया।

बेवफा

भुला देना उसकी हर याद को,
सोच लेना की किस्सा भर था,
क्योंकि, वो जिंदगी नहीं,
जिंदगी का एक हिस्सा भर था।

अपना मन

एक दिन शांत चित्त हो,
एकांत में बैठ कर,
अपने मन से पूछना,
वो क्या चाहता है?
कर ली सबने अपने मन की,
मन तो तुम्हारा भी है,
सुन लेना कभी उसकी,
आखिर वो क्या चाहता है।

अतीत

ढूंढ रहा था कुछ,
बंद लिफाफों में,
दिख गए,
कुछ अतीत के टुकड़े,
समेट रखे थे,
जिन्हें अलमारी में,
कुछ खत थे मोहब्बत के,
कुछ सुखी पंखुड़ियाँ,
गुलाब की,
कुछ तोहफ़े थे,
मोहब्बत के,
उन तोहफ़ों में, ताजमहल,
मेरा ख़ास है,
 
टूट चुके उन ख्वाबों में,
शायद अब भी कुछ बाकी है,
एक भीनी सी खुशबू,
कुछ तेज धड़कनें,
और बंद आखों में छिपी,
उनके प्यार की नमी।

मेरी पहचान

कुछ ख़ास नहीं थी पहचान मेरी,
बस महबूब था मैं किसी का,
वो आइना थी मोहब्बत की,
खुद को उसमे देख पाता था,
फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ,
मेरी पहचान मुझसे कहीं खो गयी,
जो कल तक किसी का मोहब्बत था,
आज खुद के लिए एक सवाल था,
प्यार में अक्सर ऐसा होता है,
टुटा हुआ दिल भी रोता है,
उसकी यादों को सीने से लगाए,
वो जागता और वो सोता है।

जो मिल पाते

अनुराग भरा ह्रदय,
उसमे बसे सन्देश,
एक ख्वाब भरी दुनिया,
कुछ आदर, कुछ स्नेह,
सब कुछ थमा आते,
तेरी कोमल सी हाथों में,
जो हम मिल जाते एक बार।

एक दूजे की क़द्र:

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“संग चले थे कितने ही कदम, तुम्हारा हाथ लेकर अपने हाथ में,
आज चल रहा हूँ अकेला, पर तुम्हारी खुशबु अब तक है साथ में। ”

………. वो पल कितने हसीं होते है, जब कोई चाहने वाला साथ होता है। कई बार ऐसा हो जाता है की हम उनकी क़द्र करने में कमी कर देते है, और उनकी अहमियत हमें उनके दूर चले जाने के बाद पता चलती है। ये जिंदगी गम के लिए बहुत छोटी है, खुशियाँ बाँटने और पाने का नाम ही जिंदगी है। एक दूजे की क़द्र करें, उन्हें ये एहसास दिलाते रहे की हम उनसे कितना प्यार करते है। फिर देखिएगा जिंदगी कितनी आसान लगने लगती है।