मयखाना

तेरे मेरे दुःख का साथी एक यही मयखाना है,
गाली देती, फिर भी आती, ऐसा तो ये जमाना है,
हिन्दू मुस्लिम कोई न रहता, जब जाम गले से उतरता है,
भाई तब भाई का ना रहता, दुश्मन, दुश्मन का दिवाना है।

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