एक दूजे की क़द्र:

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“संग चले थे कितने ही कदम, तुम्हारा हाथ लेकर अपने हाथ में,
आज चल रहा हूँ अकेला, पर तुम्हारी खुशबु अब तक है साथ में। ”

………. वो पल कितने हसीं होते है, जब कोई चाहने वाला साथ होता है। कई बार ऐसा हो जाता है की हम उनकी क़द्र करने में कमी कर देते है, और उनकी अहमियत हमें उनके दूर चले जाने के बाद पता चलती है। ये जिंदगी गम के लिए बहुत छोटी है, खुशियाँ बाँटने और पाने का नाम ही जिंदगी है। एक दूजे की क़द्र करें, उन्हें ये एहसास दिलाते रहे की हम उनसे कितना प्यार करते है। फिर देखिएगा जिंदगी कितनी आसान लगने लगती है।

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