अवन्ति-एक प्रेम कहानी (दृश्य १२ – वापसी)

आखिर वो दिन आ ही गया जब मुझे वापस सिलीगुड़ी जाना था। मेरी छुट्टियाँ समाप्त हो गयी थी। मेरा मन बड़ा खट्टा सा हो रहा था। वैसे तो ये हर बार की बात है पर इस बार कुछ अलग सा एहसास था। अवन्ति से दूर जाने का मन नहीं कर रहा था। मन कर रहा था की बस उसी के पास रह जाऊं। इन बीते कुछ दिनों में हर रोज उससे मिलना, बातें करना, रह रह कर यही सब याद आ रहा था।

“देव बेटा, आओ जल्दी से नाश्ता कर लो।” – मम्मी की आवाज सुन देखा तो सुबह के ८ बज चुके थे। मुझे ९ बजे की बस भी पकड़नी थी।
“आया मम्मी” – कहकर मैं कुछ छोटे मोटे सामान, जो पैक करने रह गए थे, उन्हें समेटने लगा। Continue reading

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अवन्ति-एक प्रेम कहानी (दृश्य ११ – मेला-अनजान लड़की)

“यूँही कट जाएगा सफर साथ चलने से, की मंजिल आएगी नजर साथ चलने से।” – ‘हम हैं राही प्यार के’ फिल्म का ये गाना बार बार मेरे जहन में आ रहा था। मैं अपनी ही सोच में डूबा हुआ था कि अवन्ति की आवाज ने मेरा ध्यान तोड़ दिया। वो कह रही थी की चलो न कुछ फोटोज़ खींचते हैं। मैंने भी हामी भर दी। अवन्ति ने आवाज देकर अयान और पीहू को भी बुलाया जो कि थोड़ी दूर निकल गए थे। अवन्ति को उसी जगह पर फोटो लेना था। वैसे वो जगह थी भी काफी खुबसुरत। पहाड़ीनुमा खेत और उसके ठीक निचे शोर मचाती पहाड़ी नदी और नदी के दूसरी ओर हरियाली में लिप्त चाय का बागान। अद्भुत दृश्य था वो। हमने ढेर सारी फोटोज़ खींची और जब अवन्ति का मन भर गया तो फिर हम आगे के लिए निकल पड़े। Continue reading