अमर जवान

ये वीर कर्मठ, अटल हैं,
जननी जिनकी धरा है,
हाथ बन्दूक, सीना तान,
लोहा लेने खड़ा है,
आंच ना आने पाए वतन पे,
इसी जिद पे अड़ा है,
खून के अंतिम कतरे तक,
वतन के लिए लड़ा है,

वतन के नाम कर दी,
जिसने अपनी जवानी,
हँसते हँसते लड़ गए,
दे दी अपनी कुर्बानी,
तिरंगा जिनका कफ़न बना,
वो सपूत था तूफानी,
नाम उनके याद रख लेना,
सुनाना वीरता की कहानी,

आंसू गर आये कभी,
किसी शहीद की याद में,
उन्हें बह जाने देना,
कोई पूछे वजह,
तो बस इतना बतला देना,
भारत माँ की सेवा में,
अपनी माँ को छोड़ गया,
जन्म लिया एक कोख से,
दूजी की गोद में सो गया।

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