अवन्ति-एक प्रेम कहानी (दृश्य ११ – मेला-अनजान लड़की)

“यूँही कट जाएगा सफर साथ चलने से, की मंजिल आएगी नजर साथ चलने से।” – ‘हम हैं राही प्यार के’ फिल्म का ये गाना बार बार मेरे जहन में आ रहा था। मैं अपनी ही सोच में डूबा हुआ था कि अवन्ति की आवाज ने मेरा ध्यान तोड़ दिया। वो कह रही थी की चलो न कुछ फोटोज़ खींचते हैं। मैंने भी हामी भर दी। अवन्ति ने आवाज देकर अयान और पीहू को भी बुलाया जो कि थोड़ी दूर निकल गए थे। अवन्ति को उसी जगह पर फोटो लेना था। वैसे वो जगह थी भी काफी खुबसुरत। पहाड़ीनुमा खेत और उसके ठीक निचे शोर मचाती पहाड़ी नदी और नदी के दूसरी ओर हरियाली में लिप्त चाय का बागान। अद्भुत दृश्य था वो। हमने ढेर सारी फोटोज़ खींची और जब अवन्ति का मन भर गया तो फिर हम आगे के लिए निकल पड़े।

चलते चलते हम चारो काफी बातें कर रहे थे पर मेरा मन बैठा जा रहा था क्यूँकि कल मेरी छुट्टियां ख़तम हो रही थी और मुझे कल सुबह ही सिलीगुड़ी के लिए निकलना था। मतलब मेटेली में आज मेरा आखिरी दिन था और मैं चाहता था की ज्यादा से ज्यादा समय मैं अवन्ति के साथ बिताऊँ। पता नहीं आगे फिर कब मिलना हो। अवन्ति को भी शायद ये एहसास था इसीलिए वो मेरे बगल से कभी हटी ही नहीं।

चलते चलते आखिर हम अपने मंजिल पर पहुँच ही गए। काफी रंगीन मिजाज था मेले का। रंग बिरंगे ठेले लगे हुए थे। चारो तरफ सिर्फ लोग ही लोग नजर आ रहे थे। एक कोने में बहुत विशाल नागोरडोला भी लगा हुआ था। अवन्ति का बड़ा मन था उस पर चढ़ने का सो सबसे पहले हम चारो ने वही किया। काफी दिनों बाद मैं नागोरडोला पर बैठा था और मुझे काफी आनंद आया। नागोरडोला के बाद हम लोगो ने कुछ खाने का निर्णय किया और फिर मोमो, चाउमीन और न जाने क्या क्या खा गए। जब लगा की खाना बहुत हो गया है तो हम सब जाकर एक खुले मैदान में बैठ गए जहाँ पहले से ही काफी लोग बैठे हुए थे।

हम चारो इधर उधर की बातें कर रहे थे की अचानक से एक अनजान लड़की आकर मेरे बगल में बैठ गयी। अचानक हुए इस वाकये से हम सब चौंक से गए थे और हम चारो के चेहरे पर आश्चर्य और कौतुहल के भाव आ गए थे। बारी बारी से हम लोग एक दूसरे का चेहरा देख रहे थे और फिर उस लड़की की तरफ भी ताक रहे थे। वो लड़की भी हम चारो के भावों को पढ़ने की कोशिश में लगी थी। सांवली थी वो पर उसके चेहरे की बनावट काफी सुन्दर थी। जब हम चारो ने कुछ नहीं कहा तो वो खुद ही बोली।

“कृपया मुझे यहाँ से जाने के लिए मत कहना।” – उसकी आवाज में काफी दर्द था। पहली बार मैंने उसके आँखों की ओर देखा। हलकी भूरी आँखें काजल के फैलने के कारण बड़ी अजीब सी लग रही थी। मानो अभी अभी उसने काफी आँसू बहाये है।

अवन्ति ने मेरी तरफ देख इशारों में कहा की पूछो इससे की हुआ क्या है। उसकी हालत ऐसी क्यूँ है?

मैंने फिर उस लड़की की तरफ देखते हुए कहा, “ठीक है तुम डरो मत। हम तुम्हे यहाँ से जाने के लिए नहीं कहेंगे। पर क्या तुम हमलोगो को बता सकती हो की इस बड़े से मेले में तुम अकेली और यहाँ हम अनजान लोगों के बीच आकर बैठ गयी। कुछ तो गलत लग रहा है मुझे।”

उसके आँखों से आंसू फिर बह निकले थे। अपनी चुन्नी के कोर से आंसू पोछते हुए उसने कहा – “मैं चिलौनी चाय बागान की रहनेवाली हूँ। इस मेले में मैं अपने कुछ लड़के दोस्तों के साथ आयी थी। पर यहाँ पहुँचने के बाद मुझे उनकी नियत ठीक नहीं लग रही थी और उन्होंने किया भी कुछ वैसा ही। उन लड़कों में से एक ने तो मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश भी की। मैंने मना किया तो उसने मुझे मारा भी। उन लोगो से किसी तरह बचते बचाते जब मैं यहाँ तक आयी तो आप लोग दिखे और चूँकि मैंने यहां दो लड़कियों को देखा तो मुझे यहाँ बैठना सुरक्षित लगा। वो लोग मुझे ढूंढ़ रहे हैं और मैं अकेले घर जा भी नहीं सकती। कृपया मेरी मदद कीजिये।”

एक पल के लिए हम सभी सकते में आ गए की सही में अगर इस लड़की के साथ ऐसा हुआ है तो बहुत बुरा हुआ है और हमें इसकी मदद करनी चाहिए। पर अगले की पल ये भी खयाल भी आया कि कहीं ये लड़की हम सबको बेवकूफ तो नहीं बना रही। मदद मांगने के पीछे कहीं इसकी कोई गलत मंशा तो नहीं। जल्दी ही मेरा वहम दूर हो गया जब कुछ लड़के आये और उस लड़की की बांह पकड़ खींच कर ले जाने लगे।

मुझे रहा नहीं गया और मैंने उस लड़के का कन्धा पकड़ा जिसने उस लड़की को पकड़ रखा था। मैंने कहा, “ऐसी भी क्या जबरदस्ती है भाई, जब लड़की मना कर रही है तो छोड़ दो उसे।”

“छोड़ दूँ ?” – इतना कहकर बहुत जोर से हंसा वो लड़का। बड़ी गन्दी से हंसी थी। “चल हट जा और हमें जाने दे। वर्ना अन्जाम बहुत बुरा होगा।” – उसने मेरे हाथ को झटक दिया था।

मैंने तब तक अपने आप को तैयार कर लिया था की कुछ हुआ तो देख लेंगे। तब तक अयान भी पीछे से आ गया था। अवन्ति और पीहू इस मंजर को देख काफी डर गए थे।

मैंने फिर उसके कंधे को पकड़ा और इस बार इतनी जोर से की उस लड़के की आह निकल गयी। उसने लड़की का हाथ छोड़ मुझे मारने को मेरी तरफ लपका। मैं भी सी हमले के लिए तैयार था। अपने हाथों से मैंने उसके हाथ को रोका और अपने घुटने से एक जोरदार किक मारी उसके दोनों टांगों के बीच में। मेरे घुटने के लगने की देर थी वो लड़का तो वहीँ लेट कर रोने लगा। उसके रोने की आवाज इतनी दर्दनाक थी की उसके साथ आये लड़के देखते ही देखते छूमंतर हो गए। तब तक वो लड़की अवन्ति और पीहू के पास चली गयी थी।

हमारे चारो तरफ लोगों के मजमा लग चूका था और सब हमारे लिए ताली बजा रहे थे। मुझे आया गुस्सा और मैंने उनकी तरफ देख कर कहा – “बंद कीजिये ये ताली बजाना। कायर हैं आप सब। जब कुछ गलत हो रहा था तो आप सब तमाशा देख रहे थे और अब जब सब ठीक हो गया तो आप लोग निर्लज्जों की तरह ताली बजा रहे हैं। शर्म आनी चाहिए आप लोगो को। ताली बजाना छोड़िये और कुछ सीखिए आज के इस वाकये से। आगे से कभी ऐसा कुछ आपके सामने हो तो ताली बजाने का इंतजार मत कीजिये, आवाज उठाइये। तब जाकर ही हम लोग लड़कियों के लिए एक सुरक्षित समाज की कल्पना कर सकते हैं।”

मेरे इतने लम्बे भाषण को सुन धीरे धीरे भीड़ छटने लगी थी। भीड़ के हटते ही वो बदमाश लड़का भी भाग खड़ा हुआ।

मैंने अवन्ति से कहा – “यहाँ पर अभी जो कुछ भी हुआ है वो सही नहीं हुआ। अब हमें यहाँ और नहीं रुकना चाहिए। हम घर चलते हैं पर पहले इस लड़की को सकुशल घर पहुंचा के।”

“अभी पैदल जाना रिस्की रहेगा। क्या कहते हो देव?” – अयान की बात बिलकुल सही थी।
“हाँ अयान, चलो एक ऑटो ले लेंगे। अब जितनी जल्दी हो यहाँ से निकलना ही सही रहेगा।”

मेला ग्राउंड से बाहर आते ही हमें ऑटो मिल गयी। हमारे मेटेली का रास्ता चिलौनी से होकर ही गुजरता था तो हमें रास्ता बदलने की जरुरत नहीं थी। जल्दी ही हमलोग चिलौनी पहुँच गए। उस लड़की को उसके घर के सामने उतारते हुए मैंने उसे दो बातें कहीं – “आगे से अपने दोस्तों का चुनाव सही से करना और अपने आप को कभी कम मत समझना। आगे कभी भी ऐसा कुछ हो तो खुद पर भरोसा रखना और खुद लड़ना उस मुसीबत से। देखना जीत तुम्हारी ही होगी।”

मेरी बातें उसने बड़े गौर से सुनी और जाते जाते उसने कहा – “ठीक है भैया, मैं आपकी बातें याद रखूंगी। पर जहां आप जैसे भाई आस पास मिल जाये, वहां पर हम जैसी बहनो के साथ कुछ बुरा नहीं हो सकता।”

अवन्ति जो की मेरे बगल में ही बैठी थी धीरे से मेरे कान में फुसफुसाई – ” मुझे तुम्हारे ऊपर बहुत गर्व है देव। तुम जैसे दोस्त को पाकर मैं बहुत खुश हूँ।”

मेरे चेहरे पर हलकी सी मुस्कान आ गयी थी। कुछ अच्छा करने के बाद की ख़ुशी वाली मुस्कान।

 

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