मयखाना

तेरे मेरे दुःख का साथी एक यही मयखाना है,
गाली देती, फिर भी आती, ऐसा तो ये जमाना है,
हिन्दू मुस्लिम कोई न रहता, जब जाम गले से उतरता है,
भाई तब भाई का ना रहता, दुश्मन, दुश्मन का दिवाना है।

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जब मिलेंगे

चाँदनी में लिपटी जमीं होगी,
तारों से सजा आसमाँ होगा,
रंग बिरंगी बत्तियाँ रौशन होगी,
खुशबू में नहाया शमाँ होगा,
 
कुछ कदम थिरकेंगे ख़ुशी में,
मधुर गीतोँ का चित्रहार होगा,
आँखों में चाहत के जुगनू चमकेंगे,
जब उनका सामने से दीदार होगा,
 
आँखों से आँखें मिलेंगी,
बिन कहे बातों का इजहार होगा,
बंध जाएंगे जन्मों के बंधन में,
जब मंगल मंत्रों का उच्चार होगा,
 
दूल्हा दुल्हन होंगे हम,
वादों और कसमों का साथ होगा,
कुछ ऐसा होगा शमाँ,
जब मेरे हाथों में उनका हाथ होगा।

तेरी याद

तेरी यादों की तपिश ने पल पल जलाया,
आँखें सुखी रही, दिल को सदा रुलाया,
साँसों की तरह बस गयी हो सीने में,
उतना याद आती गयी, जितना तुझे भुलाया।

बेवफा

भुला देना उसकी हर याद को,
सोच लेना की किस्सा भर था,
क्योंकि, वो जिंदगी नहीं,
जिंदगी का एक हिस्सा भर था।

अपना मन

एक दिन शांत चित्त हो,
एकांत में बैठ कर,
अपने मन से पूछना,
वो क्या चाहता है?
कर ली सबने अपने मन की,
मन तो तुम्हारा भी है,
सुन लेना कभी उसकी,
आखिर वो क्या चाहता है।

अतीत

ढूंढ रहा था कुछ,
बंद लिफाफों में,
दिख गए,
कुछ अतीत के टुकड़े,
समेट रखे थे,
जिन्हें अलमारी में,
कुछ खत थे मोहब्बत के,
कुछ सुखी पंखुड़ियाँ,
गुलाब की,
कुछ तोहफ़े थे,
मोहब्बत के,
उन तोहफ़ों में, ताजमहल,
मेरा ख़ास है,
 
टूट चुके उन ख्वाबों में,
शायद अब भी कुछ बाकी है,
एक भीनी सी खुशबू,
कुछ तेज धड़कनें,
और बंद आखों में छिपी,
उनके प्यार की नमी।

मेरी पहचान

कुछ ख़ास नहीं थी पहचान मेरी,
बस महबूब था मैं किसी का,
वो आइना थी मोहब्बत की,
खुद को उसमे देख पाता था,
फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ,
मेरी पहचान मुझसे कहीं खो गयी,
जो कल तक किसी का मोहब्बत था,
आज खुद के लिए एक सवाल था,
प्यार में अक्सर ऐसा होता है,
टुटा हुआ दिल भी रोता है,
उसकी यादों को सीने से लगाए,
वो जागता और वो सोता है।

अलग शहर

एहसास तेरा साँसों में लिए,
दिन रात ये सोचा करता हूँ,
तुम अलग शहर ही वासी हो,
मैं अलग शहर में रहता हूँ,
बिन देखे कैसा मिलन हुआ,
उम्र भर को जुड़ने वाले हैं,
बंध जाएंगे रिश्ते में पर,
बन पंछी उड़ने वाले हैं।

संगिनी

एक नाम थी, अब आवाज है,
तस्वीरों में उनका दीदार हुआ,
लोग मिलने को तरसते हैं,
हमें तो ऐसे ही प्यार हुआ।

जो मिल पाते

अनुराग भरा ह्रदय,
उसमे बसे सन्देश,
एक ख्वाब भरी दुनिया,
कुछ आदर, कुछ स्नेह,
सब कुछ थमा आते,
तेरी कोमल सी हाथों में,
जो हम मिल जाते एक बार।