वो

बस एक नाम बन कर वो मेरी जिंदगी में आयी थी,
अब तो उनके जिक्र भर से होठों पे मुस्कान चली आती है।

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आदमी

निकट शाम को, गोधूलि बेला में,
यूँही पैदल निकल जाता हूँ,
जीवन की धुप-छाँव में,
ऐसे ही मन बहलाता हूँ,

सुख की परवाह नहीं मुझे,
दुखों की गिनती करता जाता हूँ,
मन की पीड़ा आंसू बन निकलते,
ऐसे ही मन बहलाता हूँ,

आदमी हूँ, कष्ट तो स्वाभाविक है,
उसे मुखौटा ओढ़ छुपाता हूँ,
धरा पर ऐसा मैं अकेला नहीं,
ऐसे ही मन बहलाता हूँ।

अब तो बस अरमान यही !!

पहले प्यार की बारिश थी,
तन संग मन भी भीगा गयी,
आज तक अनजान रहा,
वो एहसास मन में जगा गयी,
जीवन तो मेरा कोरा था,
रंग प्यार के दिखा गयी,
चाहत के रंगों से रंगी,
होली मुझको सीखा गयी,

हर सफर की हमसफ़र बनो,
अब तो बस अरमान यही,
संग तेरे हूँ तो जीता हूँ,
बिन तेरे मुझमे प्राण नहीं।

क्यूँ आयी

छोटी अपनी प्रेम कहानी, दर्द अनेकों थमा गयी,
जो तुम आयी मेरी जिंदगी में तो क्यूँ आयी,

बेदर्द हवाएँ मुझे रुलाये, हर लम्हा तेरी याद दिलाये,
बिन तेरे एक पल भी मुझको, अब सुकून ना आये,
चेहरा तेरा आँखों में बसाये, यादों को दिल में सजाये,
जीए जा रहा हूँ तेरी चाहत को सीने से लगाए,

तनहा ही जी रहा था भला, दो पल के साथ को क्यूँ आयी,
जो तुम आयी मेरी जिंदगी में तो क्यूँ आयी।