जान

आज वो दिन था, और वो ठीक मेरे सामने थी,
आज पहली बार वो मेरे इतने करीब थी,
इतनी करीब की उसकी साँसे भी महसूस कर रहा था,,
नजर थी तो बस उसके चेहरे पर, 
सब कुछ साफ़ नजर आ रहा था,
मानो पहली बार उसकी नजर से मेरी नजर टकराई हो,
उसके चेहरे की मासूमियत, उसके होठों पे बसी मीठी मुस्कान,
आँखों में छुपे अनगिनत सवाल, मन में उठी कई उम्मीदें ,
पल पल बदलते गालों के रंग, कभी सुर्ख लाल तो कभी मद्धिम,
उसकी धड़कन का तेज होना, वो इन्तजार में ठहरी पलकें,
सब कुछ नजर आ रहा था, समझ आ रहा था पर,
दो बोल बोलने को जबान साथ नहीं दे रहे थे,
शायद कोई डर था, इनकार का डर था,
काश की वो मेरे मन की बात समझ जाती,
काश की वो मुझे अपने बाहों में ले लेती,
काश की वो ही कुछ कह देती,
काश की वो मुझे इस उलझन से बचा लेती,
काश की वो मेरी कमजोरी को अपनी ताकत बना लेती,
मन इसी उधेडबुन में फंसा जा रहा था,
की होठों पे एक छुअन का एहसास हुआ,
देखा तो आँखों में आंसू थे, दोनों के,
अब सारी उलझन दूर थी, आसमान साफ़ हो गया था,
मेरी दुनिया मेरी बाहों में थी,
वो पल, वो एहसास , इस दुनिया से परे था,
वो अनन्त सुख था,
वो सुख था, किसी की दिल में अपनी जगह बनाने का,
एक इंसान से किसी और की जान बन जाने का।

jaan.jpg

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The Audio of above poem is available on Youtube –

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